रांची CITY

फॉरेंसिक विज्ञान के दिग्गज डॉ. हर्ष शर्मा ने YBN में साझा किया अपराध जांच का वैज्ञानिक अनुभव

झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•
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रांची। YBN विश्वविद्यालय , रांची के डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक साइंस द्वारा मां कलावती होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (MKHMCH) के सहयोग से अंजुराम ग्रैंड ऑडिटोरियम में ‘द साइंस बिहाइंड द एविडेंस’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान, अपराध स्थल जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों की व्यावहारिक भूमिका से परिचित कराना था। कार्यक्रम में YBN यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. (डॉ.) एस. पोद्दार, रजिस्ट्रार डॉ. दीप्ति भार्गव, प्राचार्य, MKHMCH, सहित विश्वविद्यालय के डिपार्टमेंट ऑफ फॉरेंसिक साइंस के फैकल्टी सदस्य डॉ अविनाश एवं हेमी गायकवाड़ तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता डॉ. हर्ष शर्मा, पूर्व OSD (Academics), NFSU भोपाल, ने विद्यार्थियों को अपराध जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों के महत्व की जानकारी दी। डॉ. शर्मा मध्य प्रदेश स्टेट फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के पूर्व निदेशक तथा केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण अकादमी, भोपाल में फॉरेंसिक विभाग के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। उन्हें फॉरेंसिक विज्ञान एवं अपराध स्थल जांच के क्षेत्र में 38 वर्षों से अधिक का अनुभव है और उन्होंने लगभग 4,000 अपराध स्थलों की जांच की है।

अपने व्याख्यान में डॉ. शर्मा ने अपराध स्थल प्रबंधन, साक्ष्यों के संरक्षण, फॉरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक परीक्षण की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि अपराध स्थल से प्राप्त प्रत्येक साक्ष्य का सही तरीके से संरक्षण और वैज्ञानिक परीक्षण जांच की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉ. शर्मा के पेशेवर अनुभव में सुशांत सिंह राजपूत डेथ केस, मनसुख हिरन केस, हाथरस केस, धर्मस्थला केस, नौगांव पुलिस स्टेशन ब्लास्ट केस, ट्विशा सुसाइड केस और केतन-सिया मर्डर केस सहित कई चर्चित मामलों से जुड़ी विशेषज्ञ सेवाएं शामिल रही हैं।

कार्यक्रम में उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी, झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) तथा पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी, विशेषज्ञ, शिक्षक एवं कर्मी भी उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने डॉ. हर्ष शर्मा सहित उपस्थित विशेषज्ञों के साथ फॉरेंसिक विज्ञान और अपराध जांच से जुड़े विभिन्न विषयों पर संवाद किया।

आयोजकों ने कहा कि इस प्रकार के विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने वाले सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक अपराध जांच की प्रक्रिया से जोड़ने तथा फॉरेंसिक विज्ञान के व्यावहारिक पक्ष को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।