रांची CITY

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची, में विश्व आदिवासी आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित

झारखंड उत्कर्ष संवाददाता
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची, में विश्व आदिवासी आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित  - header image
डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय रांची, में विश्व आदिवासी आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में व्याख्यान आयोजित
आज दिनांक 8 अगस्त 2026को 12:30 जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग तथा ST/SC सेल के संयुक्त तत्वावधान में विश्व आदिवासी दिवस की पूर्व संध्या पर व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यान का विषय था-"आदिवासी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति: संरक्षण, चुनौतियां एवं संभावनाएं" ।इस अवसर पर मुख्य अतिथि कुलपति प्रो राजीव मनोहर ने कहा कि आदिवासी जीवन एवं साहित्य की परंपरा समृद्ध शाली रही है। विज्ञान एवं तकनीकी के दौर में हम भले ही तकनीक से अलग नहीं रह सकते लेकिन हमें जड़ों से भी जुड़े रहना है। आदिवासी संस्कृति में श्रम परंपरा एवं सामूदायिक था की अनुठी परंपरा है। आदिवासी समूह का महत्वपूर्ण संदेश है प्रकृति का सम्मान और प्रकृति पर अधिकार नहीं वरन् सामंजस्य स्थापित करना है। मुख्य वक्ता -प्रो सत्यनारायण मुण्डा पूर्व कुलपति ने विश्व में फैले आदिवासी समूहों के बारे में नस्लीय,भाषायी, परंपरा, संस्कृति एवं भौगोलिक आधार पर बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय प्रत्येक दृष्टि से मौलिक परंपराओं में भरे पड़े हैं इनके संरक्षण की आवश्यकता है।ST/SCसेल प्रभारी डॉ जिन्दर सिंह मुण्डा ने कहा कि आदिवासी समुदाय आज के संदर्भ में ज्यादा प्रासंगिक हो गया है। पारंपरिक खाना,खेल, औषधीय पद्धति,रहने सहन की शैली आदि मानव जीवन के लिए प्रेरणास्रोत हैं।TRLके समन्वयक डॉ विनोद कुमार ने स्वागत करते हुए कहा कि आदिवासी भाषा एवं साहित्य में आज भी महत्वपूर्ण ज्ञान मौखिक परंपरा में बिखरे पड़े हैं जिनको लिपिबद्ध करने की आवश्यकता है।इस कार्यक्रम का संचालन डॉ डुमनी माय मुर्मू ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ जय किशोर मंगल ने किया। इस कार्यक्रम की सफलता में ST/SC सेल के सदस्य डॉ विजय कुमार, डॉ मालती वागीशा लकड़ा, डॉ सेलेस्टीन सोरेंग,निताई,संजय समेत हिंदी और जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों की सराहनीय भूमिका रही।