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वायु प्रदूषण से मुकाबले के लिए श्री श्री विश्वविद्यालय और ताइवान के शोध केंद्र ने मिलाया हाथ

झारखंड उत्कर्ष संवाददाता
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वायु प्रदूषण से मुकाबले के लिए श्री श्री विश्वविद्यालय और ताइवान के शोध केंद्र ने मिलाया हाथ
भुवनेश्वर/ रांची : स्वच्छ वायु और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अनुसंधान को नई दिशा और गति देने की महत्वपूर्ण पहल के तहत औड़िशा के कटकस्थित श्री श्री विश्वविद्यालय ने ताइवान स्थित नेशनल सन यात-सेन विश्वविद्यालय के एरोसोल विज्ञान अनुसंधान केंद्र के साथ साझेदारी की है। यह केंद्र एशिया का एकमात्र ऐसा समर्पित अनुसंधान केंद्र है, जो एरोसोल विज्ञान पर केंद्रित है। इस समझौता ज्ञापन के माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच संयुक्त अनुसंधान एवं शोध-पत्रों के प्रकाशन, शिक्षकों और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान, शैक्षणिक कार्यक्रमों तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान अनुदानों के लिए संयुक्त प्रस्ताव तैयार करने की दिशा में सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। इस साझेदारी का प्रमुख उद्देश्य वायु गुणवत्ता, एरोसोल विज्ञान, पर्यावरणीय स्थिरता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अनुसंधान को आगे बढ़ाना है। इस साझेदारी के अंतर्गत श्री श्री विश्वविद्यालय में वायु गुणवत्ता अनुसंधान के लिए एक सहयोगात्मक केंद्र स्थापित करने की भी परिकल्पना की गई है, जिसे बहुविषयक अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है, जब वायु प्रदूषण और सूक्ष्म कण गंभीर पर्यावरणीय एवं जनस्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं। दोनों संस्थानों की वैज्ञानिक विशेषज्ञता के समन्वय से एरोसोल के स्रोत, उनके निर्माण और वायुमंडल में होने वाले रूपांतरण की बेहतर समझ विकसित करने के साथ-साथ ऐसे समाधान तलाशे जाएंगे, जिनका व्यापक सामाजिक और नीतिगत प्रभाव हो। श्री श्री विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं विकास के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर (डॉ.) केशरी सिंह ने कहा, “यह साझेदारी श्री श्री विश्वविद्यालय को एक वैश्विक स्तर पर जुड़े हुए अनुसंधान विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों संस्थानों की पूरक विशेषज्ञताओं को एक साथ लाकर हमारा उद्देश्य ऐसे प्रभावकारी अनुसंधान को आगे बढ़ाना है, जो गंभीर पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करे तथा सुदृढ़ नीतिगत निर्णय और सतत विकास में योगदान दे।” एरोसोल विज्ञान अनुसंधान केंद्र, नेशनल सन यात-सेन विश्वविद्यालय के निदेशक प्रोफेसर चिया सी. वांग ने कहा, “स्वच्छ वायु स्वस्थ, सुरक्षित और टिकाऊ पर्यावरण के मानव अधिकार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। एरोसोल के स्रोतों, उनके निर्माण तथा रूपांतरण की प्रक्रियाओं और वायु में मौजूद सूक्ष्म कणों, विशेषकर विभिन्न मानवीय गतिविधियों से उत्पन्न कणों को बेहतर ढंग से समझकर वायु प्रदूषण को कम करने, वायु गुणवत्ता में सुधार लाने और जनस्वास्थ्य की रक्षा करने में सहायता मिल सकती है। मानव समुदाय और इस धरती पर रहने वाले सभी संवेदनशील जीवों के लिए बेहतर पर्यावरण और अधिक टिकाऊ ग्रह की दिशा में वायु गुणवत्ता संबंधी चुनौतियों का समाधान करने हेतु श्री श्री विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोगात्मक साझेदारी विकसित करना हमारे लिए बड़े सम्मान की बात है।” यह समझौता श्री श्री विश्वविद्यालय के बढ़ते वैश्विक अनुसंधान नेटवर्क को एक नया अंतरराष्ट्रीय आयाम प्रदान करता है और पर्यावरणीय स्थिरता, वैज्ञानिक सहयोग तथा ऐसे अनुसंधान को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है, जो वास्तविक जीवन की चुनौतियों के समाधान में उपयोगी साबित हो सके। इस साझेदारी का स्वागत करते हुए श्री श्री विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष श्री आदेश गोयल, कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) तेज परताप तथा कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य जी ने प्रसन्नता व्यक्त की और इस महत्वपूर्ण एवं स्वागतयोग्य पहल के लिए दोनों संस्थानों की टीमों को बधाई दी। उन्होंने इस सहयोग को श्री श्री विश्वविद्यालय के वैश्विक अनुसंधान सहयोग को सुदृढ़ करने तथा वायु गुणवत्ता, पर्यावरणीय स्थिरता और जनकल्याण के क्षेत्र में सार्थक एवं प्रभावकारी अनुसंधान को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।