धनबाद

मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल इलाज और डायलिसिस की सलाह दी गई, लेकिन परिजन मरीज को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस पर लेकर चले गए : एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल

झारखंड उत्कर्ष संवाददाता
मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल इलाज और डायलिसिस की सलाह दी गई, लेकिन परिजन मरीज को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस पर लेकर चले गए : एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल - header image
मरीज की जान बचाने के लिए तत्काल इलाज और डायलिसिस की सलाह दी गई, लेकिन परिजन मरीज को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस पर लेकर चले गए : एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल
धनबाद :एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी की मरीज के इलाज को लेकर सामने आई गलतफहमियों पर अपना आधिकारिक पक्ष स्पष्ट करना चाहता है।

मरीज एजाज शाहमा ( उम्र 48 वर्ष) को 3 अगस्त 2026 को हमारे अस्पताल में बहुत गंभीर हालत में लाया गया था। उन्हें कई दिनों से तेज बुखार, पेट में तेज दर्द और बार-बार दस्त की शिकायत थी। जांच में पता चला कि उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फैल चुका था और उनके पेट के एक महत्वपूर्ण अंग अग्न्याशय में गंभीर सूजन थी।

संक्रमण इतना ज्यादा था कि मरीज का ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था और शरीर के कई महत्वपूर्ण अंग सही तरीके से काम नहीं कर रहे थे। उनकी किडनी भी तेजी से खराब हो रही थी। मरीज का क्रिएटिनिन लगभग 6.8 mg/dL था और पेशाब भी बहुत कम हो रहा था। यह स्थिति किडनी के गंभीर रूप से प्रभावित होने का संकेत थी।

मरीज की हालत को देखते हुए अस्पताल की विशेषज्ञ टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। उन्हें आईसीयू स्तर की निगरानी में रखा गया, संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए जरूरी दवाएं दी गईं, ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक उपचार शुरू किया गया।

साथ ही, डॉक्टरों ने स्पष्ट रूप से बताया कि मरीज की किडनी को सहारा देने और उसकी जान बचाने के लिए तुरंत डायलिसिस (एसएलईडी डायलिसिस) करना जरूरी है।

अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की पूरी स्थिति और इलाज की जरूरत के बारे में परिजनों को सरल भाषा में विस्तार से समझाया। उन्हें यह भी बताया गया कि मरीज की हालत बहुत नाजुक है उन्हें वेंटीलेटर और इनट्यूबेशन में मरीज को रखने का सलाह दिया गया उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, परिजनों ने डायलिसिस और आगे के इलाज के लिए सहमति नहीं दी तथा अपनी इच्छा से मरीज को लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस (L AMA) पर दूसरे अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मरीज को परिजनों के अनुरोध पर अस्पताल से ले जाया गया।अस्पताल को मिली जानकारी के अनुसार, दूसरे अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही मरीज का दुखद निधन हो गया।एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल स्पष्ट करना चाहता है कि मरीज के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं की गई। अस्पताल की मेडिकल टीम ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए समय पर सभी जरूरी जांच की, इलाज शुरू किया और उसकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। लेकिन परिजनों द्वारा जरूरी इलाज से इनकार करने के कारण डॉक्टरों द्वारा सुझाया गया पूरा उपचार नहीं किया जा सका।डॉ. सी. राजन, सेंटर हेड, एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल ने कहा जब मरीज हमारे अस्पताल पहुंचे, तब उनकी हालत बहुत गंभीर थी। उन्हें तेज बुखार था, शरीर में गंभीर संक्रमण फैल चुका था और उनकी किडनी तेजी से काम करना बंद कर रही थी। हमारी मेडिकल टीम ने बिना देरी किए इलाज शुरू किया और तुरंत डायलिसिस की सलाह दी, क्योंकि उस समय मरीज की जान बचाने के लिए यह जरूरी था। हमने परिजनों को मरीज की स्थिति और इलाज की आवश्यकता पूरी तरह समझाई, लेकिन उन्होंने इलाज जारी रखने की

सहमति नहीं दी और मरीज को अपनी इच्छा से लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस पर दूसरे अस्पताल ले गए। अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ ने अपनी ओर से मरीज की जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। मरीज का निधन अत्यंत दुखद है और हम परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं।

एशियन द्वारकादास जालान अस्पताल हमेशा मरीजों को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और समय पर इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। अस्पताल आम जनता से आग्रह करता है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रमाणित तथ्यों और मेडिकल रिकॉर्ड को ध्यान में रखें।