संथाल परगना

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर साहिबगंज महाविद्यालय में बैठक, विद्यार्थियों के विकल्पों पर हुई चर्चा यूजी सेमेस्टर-6 के बाद एग्जिट, चतुर्थ वर्ष में नामांकन और शोध के प्रावधानों की दी गई जानकारी

झझारखंड उत्कर्ष संवाददाता•
नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर साहिबगंज महाविद्यालय में बैठक, विद्यार्थियों के विकल्पों पर हुई चर्चा  यूजी सेमेस्टर-6 के बाद एग्जिट, चतुर्थ वर्ष में नामांकन और शोध के प्रावधानों की दी गई जानकारी - header image
नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर साहिबगंज महाविद्यालय में बैठक, विद्यार्थियों के विकल्पों पर हुई चर्चा यूजी सेमेस्टर-6 के बाद एग्जिट, चतुर्थ वर्ष में नामांकन और शोध के प्रावधानों की दी गई जानकारी


साहिबगंज: साहिबगंज महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर महाविद्यालय के सभी विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जहां बैठक की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने की। इस दौरान यूजी सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न विकल्पों, एग्जिट प्रावधान, चतुर्थ वर्ष में नामांकन तथा शोध से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उधर महाविद्यालय के एनईपी नोडल पदाधिकारी एवं अंग्रेजी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. सेमी विक्टर मरांडी ने सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका में आयोजित एनईपी नोडल पदाधिकारियों की बैठक में प्राप्त जानकारी और विश्वविद्यालय की ओर से जारी स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के बारे में विस्तार से बताया। जहां उन्होंने कहा कि महाविद्यालयों को विश्वविद्यालय द्वारा जारी एसओपी के प्रावधानों का पालन करना है। वही उन्होंने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति के तहत सेमेस्टर-6 के बाद उपलब्ध अध्ययन, एग्जिट, आगे की पढ़ाई एवं शोध से जुड़े विकल्पों की स्पष्ट जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि विद्यार्थी अपनी रुचि और भविष्य की योजना के अनुसार आगे की पढ़ाई का विकल्प चुन सकें। उधर प्राचार्य डॉ. रंजीत कुमार सिंह ने कहा कि सेमेस्टर-6 के बाद विद्यार्थियों के सामने उपलब्ध विभिन्न विकल्पों की सही और स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है। इससे विद्यार्थी अपने भविष्य और उच्च शिक्षा को लेकर बेहतर योजना बना सकेंगे। आगे उन्होंने सभी विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों से विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि विकसित करने तथा उन्हें चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। वही उन्होंने बताया कि सेमेस्टर-6 के बाद एग्जिट लेने वाले विद्यार्थियों को निर्धारित प्रावधान के अनुसार यूजी डिग्री प्राप्त होगी, जबकि यूजी ऑनर्स की डिग्री के लिए संबंधित आगे के प्रावधानों को पूरा करना होगा।

कक्षाओं में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति पर जताई चिंता

उधर बैठक के दौरान महाविद्यालय के विभिन्न पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति को लेकर प्राचार्य ने चिंता व्यक्त की। जहां उन्होंने विभागाध्यक्षों एवं शिक्षकों से विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा महाविद्यालय में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित करने के लिए प्रभावी पहल करने का आग्रह किया।

छात्रावास के विद्यार्थियों का डेटाबेस तैयार करने का निर्देश

वही प्राचार्य ने महाविद्यालय के सभी छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों का समुचित डेटाबेस तैयार कर जिला प्रशासन को उपलब्ध कराने का निर्देश छात्रावास अधीक्षकों को दिया। इसका उद्देश्य कल्याण विभाग की ओर से संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कल्याणकारी लाभों को पात्र विद्यार्थियों तक पहुंचाने में सुविधा सुनिश्चित करना है। इसके अलावा महाविद्यालय परिसर में स्वच्छता, साफ-सफाई और हरियाली बनाए रखने को लेकर भी शिक्षकों एवं विभागाध्यक्षों से सामूहिक पहल करने का आग्रह किया गया। उधर बैठक में विभिन्न विभागाध्यक्षों एवं प्राध्यापकों ने महाविद्यालय में बेहतर एवं स्वस्थ पठन-पाठन का वातावरण विकसित करने को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। जहां अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ बैठक का समापन हुआ। इस बैठक में भूगर्भशास्त्र विभागाध्यक्ष सैयद रजा इमाम रिजवी, मैथिली विभागाध्यक्ष डॉ. ध्रुव ज्योति कुमार सिंह, डॉ. संजीव कुमार सिंह, डॉ. शिवानंद अवस्थी, डॉ. राजीव कुमार, डॉ. मीरा चौधरी, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. वसीम रजा, डॉ. शोभा मुर्मू, डॉ. रूपा, डॉ. रश्मि रानी, डॉ. सोनू फ्रांसिस मुर्मू, डॉ. संतोष कुमार चौधरी, डॉ. दिनेश कुमार यादव, डॉ. जिशु हेंब्रम, प्रोफेसर मरियम हेंब्रम, डॉ. सोनू कुमार साहू, डॉ. मोहम्मद हसनैन, डॉ. जितेंद्र, प्रोफेसर नितिन कुमार सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे।