रांची CITY

बीआईटी मेसरा के एआई-हाइडा 2026 के दूसरे दिन जियोएआई, फीचर इंजीनियरिंग एवं हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण पर केंद्रित रहे तकनीकी सत्र

झारखंड उत्कर्ष संवाददाता
बीआईटी मेसरा के एआई-हाइडा 2026 के दूसरे दिन जियोएआई, फीचर इंजीनियरिंग एवं हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण पर केंद्रित रहे तकनीकी सत्र  - header image
बीआईटी मेसरा के एआई-हाइडा 2026 के दूसरे दिन जियोएआई, फीचर इंजीनियरिंग एवं हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण पर केंद्रित रहे तकनीकी सत्र
रांची: बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा के मात्रात्मक अर्थशास्त्र एवं डेटा विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित “हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता ” संकाय विकास कार्यक्रम के दूसरे दिन जियोएआई, मशीन लर्निंग, हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तथा दूरसंवेदी प्रौद्योगिकी से संबंधित विविध विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। यह कार्यक्रम ई एंड आईसीटी अकादमी, एनआईटी पटना के सहयोग से तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय , भारत सरकार के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

दिन की शुरुआत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के डॉ. अमित कुमार तिवारी द्वारा आयोजित व्यावहारिक सत्र से हुई, जिसमें उन्होंने प्रतिभागियों को हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा डाउनलोड करने हेतु उपलब्ध विभिन्न निःशुल्क पोर्टलों एवं डेटा स्रोतों की जानकारी दी। उन्होंने डेटा पूर्व-प्रसंस्करण तथा इमेज वर्गीकरण तकनीकों का प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण की व्यावहारिक समझ प्रदान की।

इसके पश्चात उत्तर-पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र , अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार के वैज्ञानिक/अभियंता ‘एसई’ श्री निलय निशांत ने “स्मार्ट गवर्नेंस के लिए जियोएआई” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने हैज़र्ड मैपिंग, आपदा जोखिम मूल्यांकन, प्राकृतिक संसाधन निगरानी तथा सतत विकास योजनाओं में जियोएआई की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी, पृथ्वी अवलोकन डेटा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का समन्वित उपयोग शासन एवं नीति निर्माण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बना सकता है।

इसके बाद बीआईटी मेसरा के डॉ. वी. एस. राठौर ने हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग की मूलभूत अवधारणाओं पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार की उपग्रह इमेजरी, उनके अनुप्रयोगों तथा दूरसंवेदी आंकड़ों के विश्लेषण हेतु आवश्यक पूर्व-प्रसंस्करण तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

कंप्यूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग, बीआईटी मेसरा के प्रो. अभिजीत मुस्ताफी ने डायमेंशनलिटी रिडक्शन तकनीकों पर व्याख्यान देते हुए प्रिंसिपल कंपोनेंट एनालिसिस , इंडिपेंडेंट कंपोनेंट एनालिसिस तथा जैसी तकनीकों की कार्यप्रणाली एवं उपयोगिता को विस्तार से समझाया। उन्होंने मशीन लर्निंग तथा हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण में इन तकनीकों के महत्व पर विशेष बल दिया।

इसके उपरांत डॉ. के. के. सेनापति ने “मशीन लर्निंग में फीचर इंजीनियरिंग” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने फीचर इंजीनियरिंग की आधारभूत अवधारणाओं तथा मशीन लर्निंग मॉडलों की कार्यक्षमता बढ़ाने में इसकी भूमिका पर चर्चा की। सत्र में डायमेंशनलिटी रिडक्शन के माध्यम से फीचर एक्सट्रैक्शन तथा विभिन्न फीचर चयन तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

दोपहर के व्यावहारिक सत्रों में इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) के डॉ. विकास दुगेसर ने स्पेक्ट्रोरैडियोमीटर की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया तथा प्रतिभागियों को विभिन्न सामग्रियों के स्पेक्ट्रल हस्ताक्षर संग्रहित करने का अवसर प्रदान किया। इस गतिविधि ने प्रतिभागियों को हाइपरस्पेक्ट्रल लाइब्रेरी निर्माण एवं फील्ड-आधारित स्पेक्ट्रल डेटा संग्रहण की व्यावहारिक समझ प्रदान की।

इसके पश्चात बीआईटी मेसरा के शोधार्थी श्री नीरज कुमार मौर्य ने “पायथन आधारित हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विश्लेषण” विषय पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा के दृश्यांकन, पूर्व-प्रसंस्करण, फीचर निष्कर्षण तथा विश्लेषण की प्रक्रियाओं को पायथन आधारित उपकरणों के माध्यम से समझा।

देशभर के विभिन्न संस्थानों से आए संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं एवं शोधार्थियों ने सभी सत्रों में सक्रिय सहभागिता की। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और व्यावहारिक प्रदर्शनों के माध्यम से एआई-हाइडा 2026 कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी तथा हाइपरस्पेक्ट्रल डेटा विज्ञान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, नवाचार और अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है।